मयखाने की अभी भी तलाश है

दिल तो हर पल उदास रहता है
कोई इसे समझाए भी तो कैसे,
भूलकर उस लम्हे को,
भला कोई जीने की सोचे भी तो कैसे,
तूफानों से,
कई कश्तियां बचा लेते हैं लोग,
लेकिन जब अपने ही बेगाने हो जाए
तो भला कोई जी पाए भी तो कैसे।
सब कहते हैं, शराबी मुझे,
पर अभी मुझे है मयखाने की तलाश,
साकी का सहारा नहीं चाहिए,
सब्र करने का साहस है मुझमें,
अभी भी जीने का जज़्बा कायम है,
उम्मीदों की बात नहीं करता मैं,
लोग कहते हैं, उम्मीदों पर तो दुनिया टिकी है,
पर ये उम्मीद किसी पर टिकी है....

1 comment:

  1. लोग कहते हैं, उम्मीदों पर तो दुनिया टिकी है,
    पर ये उम्मीद किसी पर टिकी है..

    -बहुत गहन विचार!!

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