भारत में अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण के 7598 मामले सामने आए हैं। इससे 246 लोगों की मौत हो
चुकी है। www.worldometers.info ›
coronavirus के मुताबिक, भारत ने अभी तक 189111 टेस्ट किए हैं, जबकि आबादी 1 अरब 30 करोड़ से ज्यादा है। चलिए मान लेतें है कि दो लाख की होगी
टेस्टिंग। वहीं, 33-34 करोड़ की आबादी वाला
अमेरिका अभी तक 2489786 टेस्ट कर चुका है। अब
अमेरिका से अपनी क्या तुलना करना। ज़रा पति करिए कि ईरान की आबादी कितनी है, लेकिन उसने 242,568 टेस्ट, तुर्की जैसा छोटा देश 8.2 करोड़ आबादी वाला 307,210 टेस्ट कर चुका है। अब हर देश का आंकड़ा देना भी उचित नहीं
है वरना आप कहेंगे कि आंकड़ेबाज़ी में ही उलझा दिए। लेकिन तथ्य तो तथ्य ही। भले आप
मानें या न मानें।
Photo: Internet |
लेकिन, बात भारत की नहीं। भारत
में एक राज्य है बिहार। यहां एक दिन में सर्वाधिक 21 नए कोरोना
पॉजिटिव मरीज मिले हैं। सबसे बड़ा ख़तरा यह है कि बिहार के सीवान ज़िले की हालत
चीन के वुहान जैसी हो गई। वुहान वही शहर है,
जो कोरोना का
केंद्र माना जाता है। सीवान में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 20 हो गई है। बिहार में अब तक पहली बार ऐसा हुआ है कि एक ही
दिन में वैश्विक महामारी कोरोना के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। 9 अप्रैल की सुबह से देर रात तक कुल 19 नए संक्रमितों की पहचान की गई। सैंपल जांच में सभी में
कोरोना पाजिटिव पाया गया है। इनमें सीवान के 17 हैं। 30 मार्च को कोरोना के छह मरीज मिले थे। 7 अप्रैल को भी बिहार में एक ही दिन में कोरोना छह मरीज
सामने आए थे। बिहार में 9 अप्रैल को 19 नए मरीजों के सामने आने के बाद कोरोना संक्रमितों की
संख्या 39 से बढ़कर 58 हो गई। यहां एक व्यक्ति ने परिवार के 16 लोगों को संक्रमित किया। ओमान से सीवान में आए एक संक्रमित
व्यक्ति ने आइसोलेशन में नहीं जाकर अपनी पहचान छिपाए रखी। अब इस परिवार की 12 महिलाएं और चार पुरुष अब तक कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके
हैं। सीवान में एक अन्य व्यक्ति की भी पहचान कोरोना पॉजिटिव के रूप में की गई। यह
युवक 16 मार्च को दुबई से आया
था। इस तरह सीवान में सर्वाधिक 27 कोरोना के मरीज हो गए
हैं।
इस पर तुर्रा यह कि उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी जी कह रहे
हैं कि लॉकडाउन के 15 दिन बाद भी कोरोना के नए
मरीजों की संख्या में वृद्धि से जाहिर है कि सामाजिक दूरी यानी सोशल डिस्टेंसिंग
बरतने के निर्देश का पालन करने में कई स्तरों पर चूक हो रही है। तो इस चूक को दूर
करने की जिम्मेदारी किसकी है। जानता हूं यह भी जनता के मत्थे ही थोपा जाएगा।
अब आइए नज़र डालते हैं कि बिहार कोरोना वायरस के कितने
टेस्ट किए और अभी तक कितने मामले आए। कहा जा रहा है कि बिहार में कुल 60 के करीब मामले आए हैं। जब किसी अपराध की रिपोर्ट दर्ज ही
नहीं की जाएगी, तो आधिकारिक आंकड़ों में
उसे अपराध हुआ माना ही नहीं जाएगा। यही हाल कोरोना के मामले में भी है। जब कोरोना
वायरस का टेस्ट होगा ही नहीं या कम टेस्ट होगा तो मामला ज्यादा कैसे आएगा। उधर
डॉक्टरों और स्थानीय लोगों का भी कहना है कि कोरोना के मरीजों की संख्या भले ही कम
बताई जा रही हो, लेकिन यह संख्या इससे
कहीं अधिक है। पटना एम्स के कुछ डॉक्टरों का तो यहां तक कहना है कि ऐसे पॉजिटिव
मामले भी हैं, जिनके बारे में बताने से
मना किया जा रहा है।
दूसरी तरफ इसको भी छोड़ दें तो नीतीश कुमार ने अपने 15 साल के शासन में बिहार के स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कुछ
किया ही नहीं। इसका भी डर उनको होगा। पिछले साल मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार का
मामला सामने आए है कि कैसे बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई थी। बिहार
से ताल्लुक रखने वाले केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे तो प्रेस
कॉन्फ्रेंस के दौरान सोते पाए गए थे। यह इस बात का भी प्रतीक है कि कोरोना महामारी
पहले से ही बिहार की नाजुक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर बोझ बनने लगी है। ऐसे में
खराब योजना, सुरक्षात्मक उपकरणों की
कमी और सार्वजनिक जागरूकता की कमी भी चुनौती को बढ़ा रही है।
बिहार के डॉक्टर कैसे कोरोना वायरस से लड़ रहे हैं, इसकी मिसाल यह है कि डॉक्टरों का कहना है कि प्रोटोकॉल के
अनुसार हमें एन-95 मास्क, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट और सैनिटाइज़र दिया
जाना चाहिए। हमारी स्थिति इतनी विकट है कि हम मरीजों का इलाज करते समय खुद को
बचाने के लिए एचआईवी किट का उपयोग करते हैं। हम बिना उचित सुरक्षा उपकरण के मरीजों
का इलाज करते हैं, तो आठ घंटे की ड्यूटी के
बाद फिर इस्तेमाल किया हुआ दस्तानी ही पहनना पड़ता है। इससे डर है कि हमें भी
कोरोन वायरस न हो जाए। पीएमसीएच बिहार के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक है। यहां COVID-19 के रोगियों के लिए बेड उपलब्ध नहीं हैं।
बिहार में कोरोनो वायरस के लिए टेस्टिंग कम हो रहे हैं।
इससे डॉक्टरों पर दबाव बन रहा है। उन्हें लग रहा है कि वे ऐसे मरीजों का इलाज कर
रहे हैं, जिनमें इस तरह के लक्षण
हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें यह बीमारी हो सकती है। बिहार में सिर्फ एक ही रिसर्च
सेंटर है, जो कोरोना वायरस सैंपल का
टेस्ट करता है। फिर उसकी पुष्टि के लिए पुणे भेजा जाता है। ऐसे में कोरोन वायरस का
कम्युनिटी संक्रमण होता है, तो बिहार की स्वास्थ्य
व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त सकती है।
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